Oct 17, 2013

जेता-कुम्पा के बलिदान से प्रेरणा ले राजपूत युवा : उम्मेद सिंह करीरी

जोधपुर के सेनापति जेता और कुम्पा से "सुमेल गिरी" युद्ध के पश्चात् शेरशाह सूरी का ये कथन कि - "मैं मुठ्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की सल्तनत गँवा बैठता|" शायद हर राजपूत को गौरवान्वित कर देने के लिए प्रयाप्त होता है| लेकिन मित्रों क्या जेता कुम्पा के इस बलिदानी निर्णय पर कभी विचार मंथन किया है ??

ऐसी क्या परिस्तिथियाँ रही होंगी उनके सामने की नौ कुंटी मारवाड़धीश (जोधपुर नरेश मालदेव) के मैदान छोड़ने के निर्णय के बावजूद उन्होंने शेरशाह सूरी का सामना कर उसके दांत खट्टे कर डाले| क्योंकि उन्हें अपनी मातृभूमि, अपनी कौम के सम्मान, अपने देश की जनता से मोहब्बत थी| वो अपनी कौम का अस्तित्व बचाने के लिए लड़े, और हिंदुस्तान के सुल्तान शेरशाह सूरी को ये कहने के लिए विवश कर डाला "मैं मुठ्ठी भर बाजरे के की लिए हिंदुस्तान की सल्तनत गँवा बैठता" जिस पर हम सब का सीना गर्व से फूल उठता है|

मित्रों क्या हम अपनी कौम का अस्तित्व बचाने के लिए इस चुनावी समर में एक दिन के लिए जेता और कुम्पा जैसा निस्वार्थ समर्पण अपनी कोम के लिए नहीं दिखा सकते ?? क्या हम अपने क्षणिक लाभ हित की चिंता छोड़ समाज के हित की परवाह नही कर सकते ?? आपको अपना मत राजपूत को कमजोर करने वाली राजपूत विरोधी पार्टियों को देना है ? या सिर्फ राजपूत उम्मीद्वार को भले वो किसी भी पार्टी से हो ! जितनी ज्यादा संख्यां में हमारे लोग विधायिका में पहुंचेंगे उतनी ही मजबूती इस कौम के अस्तित्व को मिलने वाली है|

आपको जानकारी दे दू वर्तमान विधानसभा में 25 राजपूत विधायक है, इनमे राजपूत नहीं आम राजपूत कितने है आप जानते ?? 15 राजपरिवारो से जिन्हें आम राजपूत की न तकलीफ से मतलब है न हमारे गिरते हुए ग्राफ से ...आम राजपूत सिर्फ दस है| समाज बंधुओं जो हमारे हित में कार्य करने के लिए हम सब ने मिल कर जिताए ....... उनमे से पाँच पार्टियों के जरखरीद बन बैठे.....बाकि बचे पाँच को ये सरकारी भय दिखा चुप करा देते है|

विचार कीजिये ऐसे कौन लोग होंगे ? जो आम राजपूत की बात को अपने अस्तित्व से जोड़ जेपा और कुम्पा की भांति अपना सर्वस्व लुटा कौम के अस्तित्व को बचाने के लिए प्रतिबद्ध होंगे .......? इस चुनाव में सिर्फ आम राजपूत को वोट कीजिये राज घराने का गोबर उठा अपने गुलाम होने वाली मानसिकता से छुटकारा पा लीजिये ...अपना समय और समर्थन आम राजपूत के लिए खर्च कीजिये .......... सोचो ..........समझो ........... समर्पण ............ और समर्थन .... तभी कीजियेगा ...... कई आयेंगे कौम बेंचने !!

सिर्फ कौम के लिए मतदान कीजियेगा मित्रो मेरी यही इल्तिजा ......प्राथर्ना अनुनय विनय ओर आराधना है ...........जय क्षात्र धर्म (उम्मेद सिंह करीरी : अध्यक्ष, राजपूत युवा परिषद् राजस्थान)

3 comments:

kalyansingh rathore said...

जिस दिन हम लोगों में यह भावना आ गई और राज घराने का गोबर उठाने की मानसिकता से उबर गए और आम राजपूत साथ में आ गए उस दिन राजपूतों को रोकना मुश्किल हो जाएगा। पुन: राजपूती शान लौट आएगी।

Gajendra singh Shekhawat said...

खास की मानसिकता से उबर कर आम के लिए आम राजपूत को धारा से जोड़ना होगा । और जहा प्रतिनिधित्व नहीं कर सकने की स्थति में है वहा एकजुटता के साथ अपने अस्तित्व का अहसास करवाना होगा |

Rajput said...

अगर समाज सेवा की लिए खड़े होना है तो निस्वार्थ और समर्पित भाव से ही खड़ा होना पड़ेगा। समाज सेवा कांटो का ताज है न की तख्तोताज।
उमेद सा को ढेरों शुभ कामनाए, ईश्वर उन्हे उनके उद्देश्य प्राप्ति की शक्ति दे।