May 12, 2013

क्या गजब तमाशा है,,,?

तथाकथित आजाद भारत के इतिहासकारों,साहित्यकारों व व बुद्धिजीवियों के आलेखों में अक्सर हम पढ़ते आये है की राजपूतो की आपसी फुट के परिणाम स्वरुप ही भारत मुगलों व अंग्रेजो का गुलाम हुआ था. मेरे जैसा अल्पबुद्धि वाला व्यक्ति तो स्वयंभू विद्वानों के कथनो को अक्षरशः मानेगा ही. पर कोई जो जरा बहुत ज्ञान रखता होगा व तथ्यों को वास्तविकता की कसौटी पर परखता होगा,वह अवश्य विश्लेषण करेगा की  सच क्या रहा होगा. इतिहास गवाह है की जब समस्त यूरोप व मध्य एशिया इस्लामिक सत्ता के सामने जब नत मस्तक था. तब एक मात्र देश भारत ही था जहाँ के हठीले  शूरवीर राजपूत शासको ने अपने सर कटवा कर भी अपने धर्म व देश की रक्षा की थी. इसी का परिणाम है की आज भी भारत में हिन्दुओं का अस्तित्व शेष  है वरना कभी के सबके ख़तने हो चुके  होते. सामन्तवाद को गलिया दे कर जनता से तालिया बजवा कर व उन्हें बेवकूफ बना कर आपने शासन करने की भूख मिटने वाले धवल वस्त्र धारी नेताओ  के देश प्रेम व आत्म बल को देखता हूँ तो तरस आता है की जिन्हें तुम गलिया दे कर राज का आनंद ले रहे हो वे यदि कारगिल युद्ध,संसद पर आक्रमण,अनेक आतंकवादी हमलो, जवानो के सर कलम करने की घटना व चीन द्वारा कई किलोमीटर अन्दर घुस कर हमारी सम्प्रभुता को ललकारने की घटना के समय होते तो अवश्य ही इनका मुंह तोड़ जबाब देते,,चाहे स्वयं मर जाते पर कायर कभी नहीं कहलाते. शर्म आती है जब आज चाईना ने हमारे कई किलो मीटर अन्दर के बंकर को तुड़वा कर ही अपने टेंट हटाये और हम चुप है,,,जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो. हमें कम से कम मेजर शैतान सिंह जैसे सूरवीरो की शहादत का तो ख्याल तो रखना ही पड़ेगा.

5 comments:

Ratan singh shekhawat said...

जब इन्होनें देश के लिए बलिदान देने का पैमाना जेल यात्रा, सत्याग्रह, मोमबत्ती मार्च बना दिया तो कोई क्यों सिर कटवाने जायेगा ?
कभी पाक या चीन आक्रमण करेगा तो इनके द्वारा शिक्षित व प्रेरणा पाई पीढ़ी इंडिया गेट पर आक्रमणकारी देशों के खिलाफ मोमबत्ती मार्च निकलेगी और नेता सिर्फ कड़े बयान जारी करेंगे !!

Anonymous said...

jab bharat me muslim mugal akaram ho rahe the tabb dalit jatia or saath me mali kishaan suthar luhar jat sabhi moun chup the unhone kabi kisi ko samarthan nhi diya rajput tab bhi akle the kyu ki Janta k liye rajput raja rahe ya mugla unhe tax / karr to wahi chukana hai.....jab unhe ye ahassah hua ki rajput hindi dharam rakshak hai,,,tab ek alag kranti ki shurawat huyi mewar me luharo ne bhilo ne rajputo ka saat diya dhundaaad karoli k meeno ne rajputo ka saath diya jaisalmer k kishano ne bhi saath diya.....per unhone pehle swagat kiya tha in muglo ka baad me jab dharam hi duvidha me padh gaya tab rajput samarpath ho gaye sab......

1500-1700 tak hindustaan ki janta ne yahi socha tha ki sirf satta me badalav huaa hai un ki condiction me kuch bhi farak padhne wala nhi hai jab jajija kar dhram parivartan hone lage tab sabhi rajputo se madad mangne lage.....

rajesh singh Kshatri said...

बहुत सुंदर रचना।

आपकी रचनाएं http://panchayatkimuskan.com/ पर भी प्रकाशित हो सकती है इसके लिए आप अपनी रचनाएं panchayatkimuskan@gmail.com पर ईमेल करें

धन्यवाद!

तुषार राज रस्तोगी said...

नई पीढ़ी का खून पानी हो चुका किसी में दम नहीं | निकम्मी सरकार और उससे ज्यादा निकम्मी जनता | सोचने, समझने और परखने की क्षमता खो चुके हैं सब आज | बढ़िया पोस्ट

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
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shekhawat rajpura said...

बहुत ही अच्छी लगी आपकी ये पोस्ट मेने इसे fb शेयर भी किया है