Jan 1, 2011

जो ललकारे उसे ना छोड़े

ओ सीमा के प्रहरी वीरों !सावधान हो  जाना
इधर जो देखे आँख उठाकर ,उसको मार गिराना ||
बडे भाग्य से समय मिला है,उसको व्यर्थ ना खोना
भारत-हित बलि-भेंट चढ़ा कर,बीज सुयश के बोना ||

भाई और पड़ोसी होकर,छुरा भौंकते अपने
हथियारों के बल पर निशिदिन,देख रहे है सुख सपने |
अत्याचारी चीन,पाक को,बढ़ बढ़ हाथ दिखाना
घर बैठे गंगा आई है,न्हाना पुन्य कमाना ||

सीखा है धरती पर तुमने,करना वरण मरण का
साक्षी है इतिहास धारा पर,रावण सिया हरण का |
दे दो आज चुनौती,कह दो,हम है भारत वाले
हमें ना छेडो,हम उद्जन बम,हम रॉकेट निराले ||

चंद्रगुप्त,पोरस,सांगा -सा ,करना है रखवाली
भारत माँ के वीर सपूतो!तुम हो गौरवशाली |
पीछे रहे,न रहे कभी भी,माँ की रक्षा करने
जो ललकारे उसे ना छोड़े,डटे मारने मरने ||
जयजयकार किया करती है,जनता नर-हीरो की ,
जर जमीन,जोरू यह तीनो होती है वीरो की || 

(पाथेय कण पत्रिका से साभार लेखक -सज्जन कविरान ,अजमेर )

7 comments:

संजय भास्कर said...

नव-वर्ष की शुभकामनाएँ आपको और आपके परिवार को भी

प्रवीण पाण्डेय said...

वीरों की ही धरती है।

Ratan Singh Shekhawat said...

चंद्रगुप्त,पोरस,सांगा -सा ,करना है रखवाली
भारत माँ के वीर सपूतो!तुम हो गौरवशाली |
@ बहुत दमदार पंक्तियाँ !

पर आजकल तो इन वीर सपूतों की जगह घोटालेबाजों ने ले ली है ऐसे गद्दार शासकों से देश की रक्षा की उम्मीद भी बेमानी है |

अशोक बजाज said...

सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥

सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें, और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े .
नव - वर्ष २०११ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !

निर्मला कपिला said...

प्रेरणा देती रचना। आभार। आपको सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें।

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर बात कही आप ने जी, लेकिन यह काम हमारे मिंमियाने वाले मनमोहन जी केसे करेगे, शेर की दहाड चाहिये जो हमारे वीर शहीदो के संग ही चली गई, एक मारो दस मारेगे कर के इन हरामी अग्रेजॊ को भगाया था हमारे वीरो ने....

नव-वर्ष की शुभकामनाएँ आपको और आपके परिवार को भी

Harman said...

umda rachna..
navvarsh ki shubhkaamnayein..
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