Mar 22, 2009

शेखावाटी के प्रसिद्ध युद्ध

1. हरिपुरा का युद्ध --> खंडेला के राजा केशरी सिह और बादशाह औरंगजेब के सूबेदार सैयद अब्दुल्ला के मध्य वि स० 1754 में हुआ था | युद्ध का कारन केशरी सिह का बादशाह को ट्रिब्यूट ना देना था | इस युद्ध में केशरी सिह रण खेत रहे |
2. फतेह पुर का युद्ध --> नवाब कामयाब खां ओर शार्दूल सिंह ,शिव सिंह के मध्य हुआ वि स ० 1788 में हुआ नवाब की पराजय हुयी | युद्ध का कारण फतेह पुर पर कब्जा करना था |
3. मावन्डा का युद्ध--> जाट राजा जवाहर मल व महाराजा जयपुर की सेना जिसमें सभी शेखावत ठिकानो के सरदार शामिल थे के मध्य वि.स. 1824 में मावन्डा मढौली के पास हुआ जिसमे जवाहर मॉल की पराजय हुयी लेकिन ठिकाने दारो का भी काफी नुकशान हुआ |
4. मान्ढण का युद्ध -->दिल्ली के सुलतान शाह आलम के वफादार नजब कुली खा और शेखावत सरदारों के मध्य वि.स. 1832 में सिघाना के पास हुआ | शाही सेना को भागना पड़ा बहुत से शेखावत सरदार शहीद हुए |
5. खाटू का युद्ध--> शाही सेना के वफादार मुर्ताज खा भडेज और देवी सिंह के मध्य हुआ | देवी सिंह का साथ जयपुर की सेना व शेखावत सरदार थे यह युद्ध वि.स.1837 में खाटू के मैदान में हुआ | शाही सेना के २२ हजार सैनिक मारे गए और मैदान छोड़ के भागना पडा
6. पाटन का युद्ध -->मराठो व जयपुर की सेना के बीच हुआ था जिसमें मराठो का नेतृत्व फ्रैंच सेनापति डिबेयन कर रहा था | इधर जयपुर की सेना में जोधपुर के सैनिक व् जयपुर की नागा महंतो की जमात अन्य शेखावत सरदार थे |यह युद्ध पाटन (तोरावटि) नमक स्थान पर वि.स.1847 में हुआ जिसमें शेखावतों की हार हुयी |
7. फतेहपुर का युद्ध --> यह युद्ध वि.स.1856 में मराठो व् जयपुर की सेना के बीच लड़ा गया | यह फतेहपुर के पास हुआ था | मराठो की तरफ से बामन राव के नेतृत्व में तथा जयपुर की तरफ से रोडा राम दरजी के नेतृत्व में लडा गया | इसमें भी जयपुर सेना की हार हुयी | लेकिन बामन राव को भी बहुत बडी कीमत चुकानी पडी ।
(यह लेख इतिहास के ग्रंथो को आधार मानकर लिखा गया है । चित्र गुगल से लिये गये है । किसी को आपत्ति होने पर हटा दिये जायेंगे ।)

6 comments:

Ratan Singh Shekhawat said...

नरेश जी इतिहास की बहुत अच्छी जानकारी दी है आपने ! शेखावाटी पर और भी एतिहासिक जानकारी जुटाने की कोशिश करते है |

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही अच्छी ओर सुंदर जानकारी के लिये आप का धन्यवाद

ताऊ रामपुरिया said...

वाह जी आज तो आपने हमको हमारे गांव ही पहुंचा दिया. इसमे जिस पाटन (तोरांवाटी) का जिक्र है बस वो ही हमारा गांव है , और ये सारी जगह आसपास ही हैं.

बहुत धनय्वाद इस जानकारी के लिये. कबःई बडॆ बुजुर्गों से इस बारे मे सुना था आपने पक्की जानकारी दी. बहुत धन्यवाद.

रामराम.

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

यह युद्ध हमारी वीरता की दास्ताँ है . जानकारी के लिए धन्यवाद

Anonymous said...

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dschauhan said...

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